प्रदेश में नए मुख्यमंत्री को लेकर एक तरफ भाजपा में मंथन चल रहा है तो दूसरी तरफ विधायकों में भी उत्सुकता है कि इस बार क्या उनके चेहरे को भी किसी जिम्मेदारी के लिए चुना जाने वाला है। वैसे तो मोदी और अमित शाह की जोड़ी कोई भी चौंकाने वाला फैसला कर सकती है और मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कोई चौंकाने वाला नाम सामने आ सकता है। लेकिन यह बात केवल मुख्यमंत्री को लेकर ही रही है बल्कि इस बार करीब 4 नए विधायकों को कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री की जिम्मेदारी भी मिलने जा रही है।
भाजपा से यशपाल आर्य और हरक सिंह रावत के कांग्रेस में जाने के बाद मंत्रालय में नए चेहरे दिखाई देंगे, उधर यतिस्वरानंद की हार से यह संभावना और बढ़ गई है। प्रोटेम स्पीकर बंशीधर भगत को बनाए जाने के बाद यदि उन्हें ही अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाती है तो मंत्री पद पर एक और नया चेहरा आने की उम्मीद है। यह तो खाली हुए मंत्री पद के लिहाज से दिखाई दे रहा है लेकिन खबर यह भी है कि इस बार धामी सरकार में मंत्री रहे कुछ दूसरे लोगों को भी बाहर का रास्ता दिखा कर नए लोगों को जिम्मेदारी मिल सकती है।
वैसे मुख्यमंत्री के तौर पर अभी देखा जाए तो पुष्कर सिंह धामी के ही दोबारा रिपीट होने की संभावना है, लेकिन भाजपा हाईकमान के काम करने की स्टाइल इस बात की इजाजत नहीं देती, यानी पार्टी इस तरह के प्रयोग करने से बचती रही है, जाहिर है कि ऐसा हुआ तो प्रदेश में सांसदों में से किसी एक पर विचार संभव है, लेकिन डॉ रमेश पोखरियाल निशंक, तीरथ सिंह रावत की भी मुख्यमंत्री बनने की संभावना बेहद कम है लेकिन इस रेस में अजय भट्ट प्रबल दावेदार दिखाई देते हैं। हालाकी संभावना विधायकों में से ही किसी युवा को ये जिम्मेदारी देने की ज्यादा है। यानी इस बार किसी की भी लॉटरी लग सकती है।