उत्तराखंड में देवस्थानम बोर्ड पर भाजपा सरकार ने बैकफुट पर आते हुए बोर्ड को भंग करने का फैसला लिया, भाजपा सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा झटका पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को ही लगा। दरअसल मुख्यमंत्री रहते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ही देवस्थानम बोर्ड की पैरवी करते हुए इसे कानूनी रुप दिलवाया था। लेकिन तीर्थ पुरोहित और हक हकूक धारियों के विरोध में मुख्यमंत्री बदलने के बाद इस बोर्ड को भंग कर आने का इतना दबाव बनाया कि आखिरकार भाजपा सरकार को चुनाव से पहले इस कानून को वापस लेना पड़ा।
यूं तो यह सब इतिहास की बात हो गई है लेकिन आज इस पर चर्चा इसलिए क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि यह उनकी सरकार में एक ऐतिहासिक फैसला था जहां तक सवाल कानून को वापस लेने का है तो आज भी यदि सरकार जनमत संग्रह कराए तो देश की जनता देवस्थानम बोर्ड के हक में ही अपना फैसला देगी। जाहिर है कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस बयान ने मौजूदा भाजपा सरकार के फैसले पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका इस तरह देवस्थानम बोर्ड पर एक बार फिर बोलना और जनता का इसे समर्थन होने की बात कहना यह जाहिर करता है कि भाजपा सरकार ने चुनाव से पहले बोर्ड को वापस लेने का फैसला दबाव में किया था।