एबीवीपी की जीत युवाओं के विश्वास की गवाही, सोशल मीडिया पर धामी छाए

उत्तराखंड में छात्र संघ चुनाव के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। यह जीत स्पष्ट करती है कि युवाओं का भरोसा एबीवीपी पर लगातार बढ़ रहा है। खास बात यह रही कि चुनावी परिणाम आने के साथ ही सोशल मीडिया पर #UttarakhandYuvaWithDhami ट्रेंड करता रहा, जो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रति युवाओं के समर्थन का संकेत है।

पिछले करीब चार वर्षों में धामी सरकार ने युवाओं को ध्यान में रखकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्त कानून बनाना, भर्ती घोटालों की जांच कराना और नई भर्तियों की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना युवाओं के बीच भरोसे को मजबूत करने वाले कदम रहे हैं। इसके साथ ही रोजगार मेलों के जरिए हजारों युवाओं को अवसर दिलाने और खेलों को प्रोत्साहन देने जैसे निर्णयों ने भी युवा वर्ग को धामी के करीब ला दिया है।

यही वजह है कि सोशल मीडिया पर युवाओं ने खुलकर मुख्यमंत्री का समर्थन जताया और छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी की जीत को धामी की नीतियों से जोड़ते हुए इसे युवा शक्ति का विश्वास बताया।

उत्तराखंड छात्रसंघ चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने एक बार फिर अपनी मजबूत पकड़ और व्यापक लोकप्रियता का प्रदर्शन किया है। अब तक आए नतीजों के अनुसार प्रदेश के अधिकांश कॉलेजों में एबीवीपी ने विजय दर्ज की है। नामांकन प्रक्रिया के बाद ही 27 कॉलेजों में अध्यक्ष पद पर एबीवीपी प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे, जो संगठन की जमीनी ताकत का स्पष्ट संकेत है।

डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून में ऋषभ मल्होत्रा और एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में महिपाल बिष्ट की जीत ने प्रदेश की सबसे बड़ी शैक्षणिक संस्थाओं में भगवा परचम लहराया है। शुद्धोवाला डोईवाला, ऋषिकेश, करणप्रयाग, श्रीनगर, खटीमा और कोटद्वार जैसे प्रमुख कॉलेजों में भी एबीवीपी का कब्जा साबित करता है कि छात्रों ने संगठन की कार्यशैली और मुद्दों पर विश्वास जताया है।

एबीवीपी का मानना है कि यह जीत केवल चुनावी विजय नहीं बल्कि छात्रों के संघर्षों और वास्तविक मुद्दों की जीत है। संगठन लंबे समय से पारदर्शी परीक्षाओं, बेहतर शैक्षणिक माहौल और छात्र हितों की रक्षा के लिए सक्रिय रहा है। यही कारण है कि छात्रों ने राष्ट्रहित और छात्रहित से जुड़े पैनल को प्राथमिकता दी।