भारत निर्वाचन आयोग के आदेशों को राज्य में यूं तो गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लेकिन पिछले दिनों भारत निर्वाचन आयोग द्वारा उत्तराखंड के गृह सचिव शैलेश बगौली को हटाया जाना इस बात को साबित करता है कि अधिकारियों को भारत निर्वाचन की गाइडलाइन का ठीक से ज्ञान ही नहीं था!! ऐसा होता तो गाइडलाइन का अनुपालन किया जाता और भारत निर्वाचन आयोग को गृह सचिव को नहीं हटाना पड़ता। खास तौर पर कार्मिक विभाग इस मामले में और अधिक गंभीर होना चाहिए था!!
ताजा मामला मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास मौजूद तमाम विभागों को हटाए जाने से जुड़ा है। पिछले दिनों 20 मार्च को आईएएस अधिकारी विनोद सुमन ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम के पास मौजूद विभिन्न विभागों का चार्ज ले लिया। इसमें सहकारिता, मत्स्य, पशुपालन और दुग्ध विकास जैसे विभाग शामिल थे।
वैसे भारत निर्वाचन आयोग ने 31 जनवरी को ही अधिसूचना जारी कर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास विभिन्न विभागों को वापस लिए जाने या तत्काल सौंपे जाने की बात लिखी गई थी। बहरहाल इस अधिसूचना का कितना पालन हुआ इस पर तो शासन और कार्मिक विभाग को मनन करना है!!
लेकिन IAS अधिकारी विनोद सुमन ने आचार संहिता के दौरान इन विभागों का चार्ज लिया है तो सवाल भी कई खड़े हो रहे हैं, इसके अलावा जिस तरह ट्रांसफर से जुड़े आदेश को गोपनीय रखा गया वह भी बड़े सवाल खड़े करता है!!
हालांकि इस पूरे मामले में नियमों को लेकर क्या स्थिति है यह तो निर्वाचन आयोग को ही तय करना है। ताकि चुनाव के दौरान पारदर्शिता और सुचिता बनी रहे।