उत्तराखंड कांग्रेस के मौजूदा हालात किसी से छिपे नहीं है, स्थिति यह है कि 2017 के चुनाव में पार्टी महज 11 सीटों पर सिमट कर रह गई और राज्य में कांग्रेस की सक्रियता भी हाशिए पर चली गई। इन सभी स्थितियों के बीच अब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने सवाल खड़े किए हैं वह पार्टी के लिए बेहद चिंताजनक है, चिंताजनक इसलिए क्योंकि किशोर उपाध्याय ने अपने बयान में कुछ पुरानी यादों को ताजा करते हुए हरीश रावत सरकार के दौरान लिए गए फैसलों पर प्रश्नचिन्ह खड़े किए हैं। किशोर उपाध्याय ने जहां उस दौरान राज्यसभा सीट पर खुद को ना भेजे जाने से पार्टी में असंतोष की स्थिति पैदा होने समेत क्षेत्रवाद और जातिवाद फैलने की बात कही है, वहीं उन्होंने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने पर भी सवाल खड़े किए हैं। किशोर उपाध्याय ने कहा कि जब harish rawat 2 सीटों से विधानसभा का चुनाव हार गए ऐसी स्थिति के बाद भी उन्हें सीडब्ल्यूसी में जगह दी गई लेकिन पार्टी चुनाव हारी तो उन्हें अध्यक्ष पद से हटा दिया गया जोकि गलत फैसला था। और इसीलिए कांग्रेस महज 11 सीटों पर सिमट कर रह गई थी अन्यथा कांग्रेस का यह हश्र नहीं होता। किशोर उपाध्याय के इस बयान से साफ है कि राज्य की राजनीति एक बार फिर गर्म होने जा रही है और पार्टी के अंदर मतभेद की रेखा फिर लंबी होती दिख रही है।
*हिलखंड*
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