कोरोना संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित व्यवसायियों में वेडिंग पॉइन्ट संचालको का नाम भी शामिल हैं। पहले लॉकडाउन और फिर कर्फ्यू के कारण न केवल शादी या पार्टी के कार्यक्रम पूरी तरह से बंद कर दिए गए, बल्कि कोरोना के डर से पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों को भी लोगों ने स्थगित कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से कोरोना की रोकथाम के मध्य नजर कई पाबंदियां भी ऐसे कार्यक्रमों पर लगाई गई। ऐसे में इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की आर्थिक रूप से कमर पूरी तरह से टूट गई है। संक्रमण के आंकड़े कम होने के साथ व्यवसायियों में कुछ उम्मीद तो जगी लेकिन कड़े नियम अब भी इनकी मुसीबतों को कम नहीं कर रहे हैं। फिलहाल 22 जून तक शादी समारोह में शामिल होने वाले लोगों की संख्या को 50 कर दिया गया है। लेकिन व्यवसायियों के लिए परेशानी यह है कि इस छूट के साथ इन सभी 50 मेहमानों की rt-pcr नेगेटिव रिपोर्ट को अनिवार्य किया गया है। जबकि उनकी रिपोर्ट की जांच के बाद ही समारोह में मेहमानों को शामिल किए जाने की जिम्मेदारी भी वेडिंग प्वाइंट संचालकों पर ही छोड़ी गई है। जिससे व्यवसायियों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वेडिंग प्वाइंट संचालकों के संरक्षक अनिल चड्ढा कहते हैं कि वेडिंग प्वाइंट संचालकों के लिए पहले ही आर्थिक रूप से दिक्कतें काफी ज्यादा बढ़ गई है पिछले 2 साल से उनका व्यवसाय ठप पड़ा है… ऐसे में जब कुछ राहत की उम्मीद की गई तब भी मेहमानों के rt-pcr की अनिवार्यता ने व्यवसायियों की दिक्कतों को कम नहीं होने दिया है। ऐसे में सरकार को शादी समारोह में शामिल होने वाले मेहमानों की rt-pcr रिपोर्ट नेगेटिव की अनिवार्यता को खत्म कर देना चाहिए।
वेडिंग प्वाइंट संचालकों की दूसरी डिमांड जीएसटी को लेकर है, दरअसल इस व्यवसाय से जुड़े व्यवसायियों को 18% जीएसटी देनी होती है, मौजूदा कोरोना काल में व्यवसायियों के लिए भारी जीएसटी देना काफी मुश्किल हो रहा है इसलिए आज से व्यवसायियों की मांग है कि जीएसटी में भी व्यवसायियों को राहत दी जाए और वेडिंग प्वाइंट संचालकों से जीएसटी की कटौती कम करते हुए 5 प्रतिशत की जाए।
*हिलखंड*
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